
उपराष्ट्रपति ने आर्थिक राष्ट्रवाद को देश के आर्थिक विकास के लिए सबसे उत्कृष्ट मौलिक कारक बताया, कहा- केवल वही वस्तुएं या सेवाएं आयात करें, जो काफी जरूरी हो
‘वोकल फोर लोकल’ बनने की जरूरत है, यह ‘स्वदेशी आंदोलन’ के सार को दिखाता है: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने मूल्य संवर्धन के बिना कच्चे माल के निर्यात को लेकर सावधान किया, इसे ‘देश के लिए कष्टदायक’ बताया
उपराष्ट्रपति ने प्रमुख उद्योगपतियों से देश में अनुसंधान और विकास को ‘प्रोत्साहन, वित्त, समर्थन, संरक्षण’ देने का अनुरोध किया
उपराष्ट्रपति ने आज नई दिल्ली में भारत स्टार्टअप और एमएसएमई शिखर सम्मेलन को संबोधित किया
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज व्यापार और उद्योग निकायों का ध्यान “आर्थिक राष्ट्रवाद को नहीं अपनाने के बुरे परिणामों” की ओर दिलाया। उन्होंने आर्थिक राष्ट्रवाद को “हमारे आर्थिक विकास के लिए सबसे उत्कृष्ट मौलिक कारक” बताया। उपराष्ट्रपति ने केवल वही वस्तुएं या सेवाएं आयात करने का आह्वाहन किया, जो भारत की विदेशी मुद्रा की निकासी, नागरिकों के लिए रोजगार के अवसरों की कमी और उद्यमिता के विकास में बाधाओं को रोकने के लिए “अपरिहार्य रूप से जरूरी” है।


