राजनीति

मोदी और आरएसएस के चहेते हिंदुत्व के नए सारथी कैसे बनते जा रहे देवभूमि के मुख्यमंत्री धामी

देहरादून: पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें भाजपा और संघ परिवार से गहरे जुड़ाव के कारण हिंदुत्व की मजबूत छवि वाला नेता माना जाता है। उनकी यह छवि उनकी प्रारंभिक संगठनात्मक पृष्ठभूमि, राजनीतिक यात्रा और मुख्यमंत्री के रूप में अपनाई गई नीतियों से विकसित हुई है। विस्तार से समझते हैं कि वे कैसे इस छवि के प्रतीक बने।

1. प्रारंभिक जीवन और संघ परिवार से जुड़ाव: हिंदुत्व की नींव
धामी का जन्म पिथौरागढ़ जिले के टुंडी गांव में एक कुमाऊंनी राजपूत परिवार में हुआ। उनके पिता सेना में सूबेदार थे, जो अनुशासन और देशभक्ति की भावना को दर्शाता है। शिक्षा के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक, एमएचआरएम, एलएलबी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद, वे 1990 के दशक में राजनीति में सक्रिय हुए।

– आरएसएस और एबीवीपी की भूमिका: धामी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रशिक्षित स्वयंसेवक हैं। वे संघ शिक्षा वर्ग के प्रशिक्षण से गुजरे और लखनऊ विश्वविद्यालय स्तर से अवध प्रांत स्तर तक दायित्ववान कार्यकर्ता रहे। 1990 में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से छात्र राजनीति शुरू की, जो भाजपा का छात्र संगठन है। यहां वे हिंदुत्व विचारधारा से गहराई से जुड़े, जहां वे स्थानीय युवाओं के लिए 70% आरक्षण जैसी मांगों के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देते रहे।

– प्रभाव: आरएसएस की पृष्ठभूमि ने उन्हें हिंदुत्व का मूल सिद्धांत सिखाया, जैसे देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक रक्षा। यह छवि बाद में उनकी राजनीति का आधार बनी। जनता और मीडिया उन्हें “संघ का सिपाही” के रूप में देखते हैं, जो हिंदू एकता और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर देते हैं।

2. राजनीतिक करियर: भाजपा में उभार और मुख्यमंत्री बनना
धामी का राजनीतिक सफर 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद तेज हुआ। वे पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी (जो हिंदुत्व समर्थक हैं) के सलाहकार रहे। 2002-2008 तक वे भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने, जहां उन्होंने स्थानीय युवाओं के हितों को हिंदुत्व से जोड़ा।

– विधायक से मुख्यमंत्री: 2012 और 2017 में वे खटीमा से विधायक बने। 2021 में तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद 4 जुलाई को वे 45 वर्ष की आयु में उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। 2022 विधानसभा चुनाव में खटीमा से हारने के बावजूद, भाजपा विधायकों ने उन्हें फिर से चुना। बाद में चंपावत उपचुनाव में 92% वोटों से जीतकर उन्होंने अपनी लोकप्रियता साबित की। वे राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए।

– हिंदुत्व की छवि का निर्माण: चुनावी वादों में हिंदुत्व प्रमुख था। 2022 चुनाव से ठीक पहले उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का वादा किया, जो भाजपा-आरएसएस का लंबे समय का एजेंडा है। योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं का समर्थन मिला, जिससे उनकी हिंदुत्व इमेज मजबूत हुई। जनता उन्हें “धर्म रक्षक” के रूप में देखने लगी, खासकर देवभूमि की सांस्कृतिक सुरक्षा के संदर्भ में।

3. नीतियां और कार्य: हिंदुत्व को अमल में लाना
मुख्यमंत्री बनने के बाद धामी ने ऐसी नीतियां लागू कीं जो हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करती हैं। ये कदम “लव जिहाद”, “लैंड जिहाद” और “धर्मांतरण” जैसे मुद्दों पर केंद्रित हैं, जो भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा हैं।

– यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC): 2022 चुनावी वादे के तहत, 2024 में UCC विधेयक पारित करवाया, जो उत्तराखंड को भारत का पहला राज्य बनाया। यह विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति अधिकारों में समान कानून लाता है। धामी ने इसे “सामाजिक सद्भाव और महिला सशक्तिकरण” का प्रतीक बताया। 2025 में UCC में संशोधन कर लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्ती बढ़ाई, जैसे विवाहित व्यक्ति के लिए 7 साल की सजा। यह कदम हिंदुत्व समर्थकों में उनकी लोकप्रियता बढ़ा गया।

– एंटी-कन्वर्जन लॉ: 2022 में फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट में संशोधन कर धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध बनाया, सजा 3-10 साल। 2025 में इसे और सख्त किया, जहां विदेशी फंडिंग या धोखे से कन्वर्जन पर 20 साल तक सजा। धामी ने इसे “लव जिहाद” रोकने का हथियार बताया। हाल ही में मदरसा एजुकेशन बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक लाया, जो सिख, जैन आदि को शामिल करता है लेकिन मुस्लिम संस्थानों पर निगरानी बढ़ाता है।

– अवैध निर्माण और जिहाद के खिलाफ अभियान: 2023 से “लैंड जिहाद” के नाम पर अवैध मजारों और मदरसों पर बुलडोजर कार्रवाई। धामी ने कहा, “1,000 से ज्यादा अवैध मजारें हटाईं, जहां अवशेष भी नहीं मिले।” “थूक जिहाद” (स्पिट जिहाद) और “लव जिहाद” पर भी सख्ती। 2023 में हरिद्वार धर्म संसद में हेट स्पीच के बावजूद, उन्होंने अवैध निर्माण हटाने का समर्थन किया। ऑपरेशन कलनेमी के तहत सनातन संस्कृति को अपमानित करने वालों पर कार्रवाई।

– अन्य कदम: 30% महिलाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण, केदारनाथ-हेमकुंड रोपवे जैसे धार्मिक पर्यटन प्रोजेक्ट। ये कदम देवभूमि की “मूल स्वरूप” रक्षा के रूप में प्रचारित किए गए।

4. जन धारणा और विवाद: हिंदुत्व आइकन के रूप में उभार
– समर्थन: हिंदुत्व समर्थक धामी को “हिंदुत्व का नया पोस्टर बॉय” कहते हैं, खासकर योगी और हिमंता बिस्वा सरमा से तुलना में। सोशल मीडिया पर #धर्म_रक्षक_धामी ट्रेंड करता है। 2025 में तीन साल पूरे होने पर उन्होंने UCC और एंटी-कन्वर्जन को “रिपोर्ट कार्ड” में प्रमुख बताया। पीएम मोदी ने उनकी प्रशंसा की।

पुष्कर सिंह धामी हिंदुत्व की छवि वाले नेता बने क्योंकि उनकी यात्रा आरएसएस से शुरू होकर UCC जैसी नीतियों पर समाप्त होती है। वे देवभूमि की सांस्कृतिक रक्षा को हिंदुत्व से जोड़ते हैं, जो भाजपा की विचारधारा का प्रतीक है। वास्तव में, उनके कदम उत्तराखंड को हिंदुत्व एजेंडे का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में हैं।

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