डीडी कॉलेज ने जगाई स्वास्थ्य चेतना की मशाल”

नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।प्रतिक्रिया: डीडी कॉलेज का स्टाफ हुआ प्रभावितसभी शिक्षकों, स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों ने डॉ. कुरेले के इस प्रेरणादायक सत्र को सराहा। एक शिक्षक ने कहा: “हमने पहली बार महसूस किया कि स्वास्थ्य की रक्षा केवल दवाओं से नहीं, बल्कि हमारी दिनचर्या, सोच और प्रकृति के साथ सामंजस्य से होती है।”आयुर्वेदिक पुनर्जागरण की ओर एक कदमडीडी कॉलेज और डॉ. राजीव कुरेले की यह साझेदारी केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी और समाज को आयुर्वेद की अमूल्य थाती से जोड़ने का प्रयत्न है। जिस धरती ने चरक, सुश्रुत, और पतंजलि जैसे आयुर्वेदिक मनीषियों को जन्म दिया, वहां इस तरह के आयोजन एक नव-चेतना का संचार करते हैं।भविष्य की रूपरेखा: क्या कुछ विशेष होने जा रहा है?प्रत्येक माह में एक जिला स्तरीय स्वास्थ्य शिविरकॉलेजों में ‘आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल क्लब’ की स्थापनाडिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से योग एवं स्वास्थ्य वेबिनारमहिला स्वास्थ्य, किशोरावस्था, बुजुर्गों की देखभाल पर केंद्रित विशेष व्याख्यानयह पहल एक मॉडल के रूप में उभर सकती है, जहां शैक्षिक संस्थान केवल अकादमिक केंद्र न होकर, जनस्वास्थ्य जागरूकता के मंदिर बन जाएं। इस ऐतिहासिक शुरुआत को सराहते हुए यह विश्वास करता है कि यदि इस प्रयास को सतत और समर्पित भाव से आगे बढ़ाया जाए, तो उत्तराखंड आयुष स्टेट से हेल्थ मॉडल स्टेट बनने की दिशा में अग्रसर हो सकता है।



